Wednesday, December 30, 2009
देश की कुल जनसंख्या ११५ करोड़ है, इसमें से ७७ करोड़ भारतीय भयंकर रोगों की चपेट में हैं | ५ करोड़ भारतीय मधुमेह, ४.५० करोड़ लोग ह्रदय रोग, १२ करोड़ लोग नेत्र रोग, १.१७ करोड़ घुटने और १४ करोड़ लोग दमा,अस्थमा रोग से पीड़ित हैं| इस हिसाब से जितने चिकित्सक देश में होने चाहिए, उससे कई सौ गुना कम चिकित्सक वर्तमान में मौजूद हैं| ७७ करोड़ रोगियों के सापेक्ष मात्र २५ लाख चिकित्सक ही देश में हैं| यदि, एक चिकित्सक दिनभर कार्य करके सौ मरीजों का उपचार करे तो २५ लाख चिकित्सक ढाई करोड़ रोगियों का ही उपचार कर सकते हैं | इस गंभीर समस्या का समाधान योग और प्राणायाम से चिकित्सा का प्रचार- प्रसार करके किया जा सकता है |योग और प्राणायाम से लाइलाज बीमारियों का भी उपचार किया जा सकता है | भारत में इतने अधिक रोगी हैं कि उनके अनुपात में चिकित्सकों का भारी अभाव है | योग व् प्राणायाम से सभी लोग स्वतः ही निरोगी हो सकते हैं |इसके लिए लोगों को योग व् प्राणायाम का प्रशिक्षण प्राप्त करना ही एक मात्र उपाय है | अत: सभी सज्जनों को इससे लाभ उठाना चाहिए | जो रोगी हैं, वो निरोग रहने के लिए एवं जो रोगी नहीं हैं, उन्हें सदा पूर्ण स्वस्थ रहने के लिए योग,प्राणायाम का प्रशिक्षण प्राप्त करना ही चाहिए |यह समय कि मांग है |
Subscribe to:
Comments (Atom)