Thursday, February 3, 2011

ईमानदार प्रधानमंत्री की लाचारी

सामान्यतः देश में  यह धारणा प्रबल है कि हमारे प्रधानमंत्री साहब बड़े ईमानदार और नेक-दिल इन्सान हैं |सन 90 के आसपास ,जब वे देश के वित्तमंत्री थे,उस समय अर्थव्यवस्था की स्थिति बड़ी दयनीय हालत में थी| देश का संचित सोना भी गिरवी रख दिया गया था |उस विषम स्थिति से देश को सफलतापूर्वक बाहर निकालने का श्रेय इन्ही मनमोहन सिंह को दिया जाता है |अब सवाल यह उठता है कि इतने सक्षम व्यक्ति  आज इतने लाचार क्यों हैं?  टू जी स्पेक्ट्रम,आदर्श हाऊसिंग और कॉमनवेल्थ जैसे महाघोटाले इनके कार्यकाल में हो चुके हैं |वर्तमान में इस ईमानदार प्रधानमंत्री के मंत्रिमंडल में कितने बेईमान हैं |यह बताना मुश्किल काम है | महज कुछ घोटाले ही सामने आ पाए हैं | कितने और घोटालेबाज जनप्रतिनिधि इनके साथ हैं |यह सामने आना अभी बाकी है |इस ईमानदार प्रधानमंत्री के 5 वर्षीय कार्यकाल में इतनी बड़ी राशि का घोटाला किया जा चुका है,जितना कि पूरे ब्रिटिश राज में भी नहीं किया जा सका था | ए. राजा, सुरेश कलमाड़ी,अशोक चह्वाण जैसे दिग्गज घोटालेबाज कई वर्षो से इनकी  मंडली  में शोभा पा रहे थे |अभी कुछ दिनों पहले तक मनमोहन  सिंह यही कहते रहे कि कोई घोटाला नहीं हुआ| किन्तु कैग कि रिपोर्ट के बाद इनके स्वर में कुछ बदलाव आया | बावजूद इसके इनके कुछ सिपहसलार कैग कि रिपोर्ट को झुठला देने पर आमादा थे |लेकिन विपक्ष और जनता के दबाव के बाद ही इनकी बोलती बंद हो पाई | अब बहस का विषय यह होना चाहिए की, क्या किसी  व्यक्ति को  ईमानदारी का दावा करने मात्र से ही, ईमानदार मान लेना चाहिए ? जैसा की छद्म- धर्मनिरपेक्षकों को सच का धर्मनिरपेक्ष मान लिया जाता है | इसका जवाब नहीं में ही होना चाहिए | घोटालों की इस महा-विभीषिका के दौर में प्रधानमंत्री के सामने आज अग्नि परीक्षा की स्थिति है |स्विट्जरलैंड  की एक पत्रिका ''स्विट्जर इलस्ट्रेट'' ने 19 नवम्बर, 1991 के अपने अंक में तीसरी दुनिया के अनेकों ऐसे राजनेताओं के खातों का विवरण दिया जिसमें अरबों डॉलर पड़े हुए थे |इन नेताओं में राजीव गाँधी का भी नाम दर्ज था ,जिन्होंने बोफोर्स   के सौदे के बाद मिली दलाली का हिस्सा उस अकाउंट में  जमा  कर रखा था |पत्रिका ने के.जी. बी. के सूत्रों के हवाले से यह भी बताया की सोनिया गाँधी ने अपने नाबालिक बेटे के नाम से स्विस बैंक में एक गुप्त अकाउंट खोल रखा है ,जिसमे 2.5 अरब स्विस फ्रेंक जमा है जो लगभग 2 .2 अरब डॉलर के बराबर है |अगर इस पैसे की गणना आज के दर से की जाय  तो यह रकम 10 हजार करोड़ रु. के बराबर होगी | यह बात 1991 के दौर की है | आशय स्पष्ट है | यदि मनमोहन सिंह वास्तव में एक ईमानदार व्यक्ति हैं |तो वे पहले सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करें |तभी उनके ईमानदार होने की अफवाह को सही माना जायेगा |अन्यथा वो ईमानदारी का दावा करने के लिए स्वतंत्र हैं |
आज के अख़बारों से पता चला कि ए. राजा और उनके कुछ दरबारियों की आज गिरफ्तारी हुई  है |सुनने में लोगों को अच्छा लगा होगा |किन्तु इससे होगा क्या ? कुछ महीनों की नजरबंदी , फिर जमानत | क्योंकि भ्रष्टाचार के बिरुद्ध हमारे कानूनी किताबों में ज्यादा कुछ है नहीं |वैसे भी ये गिरफ्तारियां देर से हुई हैं,ताकि भ्रष्टाचार के गर्भ से जन्म लेने वाले पैसों को उनके सुरक्षित ठिकानों तक पहुँचाया  जा सके | यह नेक काम भ्रष्टाचारी गण कर भी चुके होंगे | यह कितनी विचित्र बात है कि राष्ट्रिय संपदा के लूटमार  को प्रधानमंत्री और उनके सहयोगी गण मात्र कर चोरी के दायरे तक ही सीमित कर रहे हैं | ऐसे में ईमानदार प्रधानमंत्री कि नेक नीयति पर सवाल उठाना लाजिमी है..

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