Sunday, June 20, 2010

नक्सली और सरकार

पिछले कई दिनों से नक्सलियों और सरकार के बीच जंग छिड़ी हुई है | नक्सली सरकारी नीतियों और सिद्धांतों के बिरुद्ध हैं |उनका मानना है कि हमारी लड़ाई सामाजिक और आर्थिक असमानता के बिरुद्ध एक जंग है |हम ब्यक्ति-२ के बीच एक दीवार के रूप में खड़ी ''प्राइवेट प्रापर्टी'' को ख़त्म करना चाहते हैं | असल, में कम्युनिस्ट विचार-धारा,समाज कि इस विडंबना को देखना पसंद नहीं करता कि एक जूता बनाने वाला नंगे पैर रहे, मकान बनाने वाले खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हों और पूंजीपति वर्ग ऐशोआराम
का जीवन जियें| लोकतंत्र में सरकारी नीतियां भी समाज कि इन्ही समस्यायों को दूर करने के लिए बनाई जाती हैं | किन्तु, धरातल पर दोनों के ही प्रयास आज असफल हैं | आज भी देश में, 40 करोड़ नागरिकों कि आय एक डालर से भी कम है | इस देश में, करोड़ों लोग भूखे पेट ही सो जाते हैं | किसी लोकतान्त्रिक देश के लिए, यह एक शर्म कि बात होनी चाहिए कि, उसके देश में कोई भूख से मर जाये | आज इस देश को कई तरह कि चुनौतियों का सामना करना है | यह समय नक्सलियों से रस्साकस्सी करने का नहीं है | सरकार को चाहिए कि नक्सलियों से वार्ता कर के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विकास का कार्य प्राथमिकता के आधार करते हुए, जन समस्याओं के समाधान में रूचि ले | ऊल जुलूल सरकारी नीतियों से देश के अन्य हिस्सों में भी इस तरह के विद्रोह उत्पन्न हों सकते हैं | अब समय आ गया है कि राजनीतिक पार्टियाँ सिर्फ सत्ता सुख में ही लीं न रहे | आज देश को बिजली, पानी और सस्ते अनाजों कि जरुरत है |  नीतियों के क्रियान्यवन कि निगरानी के लिए, सरकार को आज एक ठोस  तंत्र का निर्माण करना चाहिए | तभी, इस देश में अमन चैन का वातावरण तैयार  हों सकता है |


--अनुराग पाण्डेय

1 comment:

  1. जय हिंद क्रांतिकारी अनुराग.....!!! बहुत ही अच्छा लेख ...!!!
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