यक्ष-प्रश्न;-- कैंडीडेट युधिष्ठिर ,राजन | प्रश्न यक्ष का जारी
कौन हवा से तेज ,कौन है यहाँ भूमि से भारी ||
किसे मारता तब लीडर ,बनता धन का अधिकारी |
हर चुनाव में ,अंत समय ,क्या होता विस्मयकारी ||
युधिष्ठिर का उत्तर ,--झूठ हवा से तेज ,वोट का मूल्य भूमि से भारी |
आत्मा मारा तब लीडर ,बनता धन का अधिकारी ||
बारम्बार भ्रष्ट को चुनना ,सचमुच विस्मयकारी |
उत्तर सुनकर 'यक्ष ' गिर पड़ा, मूर्छा अब तक जारी ||
--अनुराग पाण्डेय
bahut sundar ! kripya kuch reservation ke against bhi likho, jo aaj desh ki unnati me sabase bada badhak hai
ReplyDeletebahut sundar! kripya kuchh reservation ke against bhi likho, jo aaj desh ki pargati me sabase bada badhak hai
ReplyDeleteसुन्दर चित्रण किया है आपने आज की विषम स्थितियों का. बधाई स्वीकारें - अवनीश सिंह चौहान
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