Wednesday, February 24, 2010

सारा कश्मीर हमारा है

 हमने समझा दोस्त उन्हें,वे दुश्मन हमें समझते हैं ,
नहीं फ़िक्र है उन्हें अमन की,बारम्बार उलझते हैं |
जब-जब हमने हाँथ मिलाया,उनसे सरल दोस्त बनकर,
तब-तब उनने घात किया है,सदा पीठ पीछे हमपर |
नहीं याद है उन्हें इखत्तर,का वह अमर युद्ध-सन्देश |
 जो टकराएगा हमसे,हों जायेगा वह खंडित देश |
क्षमा किया था हमने रण में,धूल चटाने के ही बाद |
यही सोचकर कि अब उन्हें,आएगी बुद्धि,न हों बर्बाद |
पर उनकी तो बुद्धि भ्रष्ट है,चढ़ आये फिर सीमा पर |
फिर ललकार हैं हमको,विगत पराजय विस्मृत कर |
विश्व-शांति अब रहे सुरक्षित,यही सोचकर हम सबने |
संयम से संघर्ष किया है,बलि दी हैं कितनी जानें |
न लो परीक्षा अब वर्ना,इच्छा सुन लो यह जन-जन की|
मिट जाएगी वो झूठी रेखा,वर्षों पूर्व विभाजन की |
सौ करोड़ कंठों का अब यह,एक अनूठा नारा है |
कारगिल से गिलगित तक,सारा कश्मीर हमारा है |
                                                                          साभार,
                                                                          स्वप्न और यथार्थ से
                                                                          रचनाकार-श्री अरविंदपाण्डेय                    

2 comments:

  1. anurag ji .....ye kavita to manniye shri Aravind ji ki book svapn our yatharth ki prishth sankhya 117 se li gai hai ...aap se gujarish hai ki aap ...shri Aravind ji ka nam jaroor likhe ....dhanyavad

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  2. सारा कश्मीर हमारा है , सारा भारतवर्ष हमारा है ! जय हिंद की सेना तैयार है ! जय हिंद !!!!!!!

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