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भारत सरकार ने 26 /11 जैसे एक और हमले की चेतावनी जारी की है | पाकिस्तान से जिस तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद थी, बिलकुल वही सामने आई | पाक के प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी ने कहा कि उनकी सरकार 26 /11 जैसा एक और हमला भारत में न होने की गारंटी नहीं ले सकता | प्रथम दृष्टया यह बात उचित ही जान पड़ती है | क्योंकि पाक खुद आतंकवाद से पीड़ित है | किन्तु, गहराई से विचार करने पर मालूम पड़ता है कि भारत व पाकिस्तान में आतंकी हमलों के लिए अलग -अलग कारण जिम्मेदार हैं भारत पर होने वाले हमले तो पाक सरकार और आतंकी संगठनो की सुनियोजित साजिश है | जिसका मिशन भारत को नष्ट कर देना है| पर पाक में होने वाले आतंकी हमले तो उनका आपसी अंतरद्वंद मात्र है |जिसकी वजह, विश्व शक्तियों के दबाव में आ कर पाकिस्तान द्वारा अपने पोषित आतंकियों पर मजबूरी में किये जा रहे जा हमले हैं | वस्तुतः, पाक सरकार की आतंकियों के बिरुद्ध कार्यवाई महज दिखावा है | वो आतंकियों को जड़-मूल से समाप्त कर देने के उद्देश्य से उन पर हमले नहीं करता, बल्कि , अमेरिका से डालर और अत्याधुनिक शस्त्रास्तों को प्राप्त करने के लिए दुनिया की आखों में धूल झोंकता है | वैसे भी वहां की सरकार तो कठपुतली जैसी है | क्योंकि, पाक में सत्ता किसी एक जगह केन्द्रित न हो कर चार 'ए' में विकेन्द्रित है | ये चार हैं - आतंकवादी, आर्मी, आई.एस.आई . और अमेरिका | अतः भारत को पाक सरकार या अमेरिका से किसी भी तरह के सहयोग की अपेक्षा न रखते हुए स्वयं को महाशक्तिशाली बनाने की दिशा में तेजी से कार्य करना होगा | किसी अन्य पर आश्रित रहने वाला देश अपनी सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं कर सकता | हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पाक से भी ज्यादा बड़ा खतरा भारत के लिए 'चीन' है | जो चारों ओर से हमारी घेराबंदी कर रहा है | भारत के लिए निरंतर सतर्कता और शक्ति-अर्जन ही सुरक्षा एक मात्र विकल्प है | हमें शक्ति की उपासना करनी ही होगी | क्योंकि, इसी से हम विकास और सुरक्षा, दोनों की रक्षा का पाएंगे | रही बात आतंकी हमलों से स्थाई बचाव की, तो इसका एकमात्र उपाय इजराइली तर्ज पर, पाक में घुस कर आतंकी फैक्ट्रियों को जड़ से नष्ट करना ही एक मात्र उपाय है| हमें , हमले होने पर अमेरिका की ओर देखने की अपनी कायराना प्रवृत्ति का परित्याग करना होगा | यही , वो तरीका है जिससे हम स्वाभिमान पूर्वक इस विश्व बिरादरी में अपना स्थान बनाये रख सकते हैं | समापन से पहले श्री दिनकर की निम्न पंक्तियाँ स्मरण हो रही हैं - ''
''सहनशीलता, क्षमा दया को, तभी पूजता जग है | बल का दर्प, चमकता उसके पीछे जब जगमग है |''
--अनुराग पाण्डेय
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