'' जनतंत्र, - गणतंत्र , प्रजातंत्र ,
कुछ भी बोलो,आज सब बेमानी है |
बीते हुए दिनों की,भूली हुई, दुखद कहानी है |
मै सह रहा था और कह रहा था ,
प्रजातंत्र के नाम को,यूँ न बदनाम करो ,
इसकी इज्जत को मत नीलाम करो |
अपराधी, चोर, उचक्कों को मत संसद,पहुँचाओ ,
प्रजातंत्र को प्रजातंत्र ही रहने दो ,
इसे गुंडा-तंत्र न बना डालो | ''\
'' जनतंत्र, - गणतंत्र , प्रजातंत्र , को ख़राब करनवाले कोई नहीं सिर्फ मेरे जैसा आम जनता दोषी है , जिसने जात पात करके गुंडा , अपराधियों को सांसंद और विधयक बना दिया | अनुराग जी आपकी ये भावना अच्छी ही नहीं बहुत ही अच्छी है !!!!!!!!
ReplyDelete!!!!!!!!!मै भी उसका मारा हूँ, पागल हू आवारा हूँ !!!!!!!!!