Saturday, January 23, 2010

आई.पी.एल. मालिकों का सही फैसला


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आज  ''सारिम अन्ना'' का लेख ' खेल भावना के खिलाफ', पढने को मिला | इस लेख में जो भी विचार व्यक्त किये हैं, मै समझता हूँ कि यह एक पक्षीय विचार है | जैसा कि सभी जानते है कि पाक सरकार की नीति में यह बात शामिल रहती है कि भारत और उसके नागरिकों को आतंकवाद की सहायता से निरंतर परेशान किये रहना है | पाक सरकार द्वारा पोषित पल्लवित और संरक्षित आतंकियों की एक टीम, अवैध रूप से देश की सीमाओं को पार कर के यहाँ आती  हैं तथा बम और गोलियां बरसा कर, निरीह और मासूम देशवासियों के साथ खून की होलियाँ  खेलती हैं | हमारे सम्मानित धर्मस्थलों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर धमाके कर के उन्हें ध्वस्त करती  हैं | ऐसे में उनकी दूसरी टीम  के साथ हम क्रिकेट खेल कर आपसी सौहार्द को कैसे कायम कर पाएंगे ? पाकिस्तान की इस दोहरी नीति को देशवासी अब सहन नहीं करेंगे |  यह आरोप कि इस फैसले में भारत के विदेश मंत्रालय की भूमिका है,बिलकुल वाहियात बात है | फिर , यदि इस आरोप को सही भी मान लिया जाय, तब तो विदेश मंत्रालय साधुवाद की पात्र है | ऐसे फैसलों के साथ सभी देशवासी  सरकार के साथ हैं | पाक को अब यह बात समझ में आ जानी चाहिए कि इस तरह की कुटिल नीतियों का भारत जबरदस्त प्रतिकार करेगा | वैसे भी आये दिन हम क्रिकेट मैचों के दौरान देखते हैं कि पाकिस्तानी क्रिकेटर भारतीय क्रिकेटरों के साथ नफ़रत की भावना के साथ पेश आते हैं | फिर, हमें आई.पी.एल. ;२' को भी याद रखना होगा | जिसमे खुद पाक सरकार ने पाकिस्तानी क्रिकेटरों को आई.पी.एल. में खेलने से मना कर दिया था | हम शांति के उपासक जरूर हैं | पर अब यह एक तरफ़ा नहीं होगा | हमारा एक सिद्धांत यह भी है कि ''शठे शाठ्यम समाचरेत'' | अंत में भारत सरकार को भी यह याद रखना चाहिए कि '' क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो, उसको क्या जो दन्तहीन, विषहीन, विनीत सरल हो'' |--अनुराग पाण्डेय

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